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प0 चंपारण बेतिया सतेंद्र पाठक

बेतिया। पचमी चंपारण बेतिया समाहरणालय के समक्ष भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) द्वारा भूमि अधिकार सत्याग्रह को लेकर 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरूआत किया गया है। भाजपा (माले) द्वारा चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष को भूमि अधिकार के संघर्षों कर हक दिवस बनाने के लिए एक ही 22 अप्रैल को आयोजित भूमि सत्याग्रह भूख हड़ताल के कार्यक्रम की शुरुआत आज बेतिया में हुई। सत्याग्रह भूख हड़ताल में शामिल हुए है। जो 30 वर्षों से अधिक समय से सीलिंग से फाजिल बेनामी गैरमजरूआ जमीन जोता कब्जे करते रहे हैं। लेकिन उन्हें कानून मान्यता देने के बदले नीतीश का जिला प्रशासन अपने फैसले को हाई कोर्ट का फैसला बता कर उन पर झूठे मुकदमे का दबाव जमीन बेदखली के लिए चला रहा है। वहां के लोग अपनी जमीन पर कानूनी मान्यता और मुकदमा वापसी के लिए भूख हड़ताल पर हैं। वैसे ही गौनाहा प्रखंड के पंचायत के रामनगर राजा की जमीन पर मिल पर्ची वाली अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए भूख हड़ताल पर हैं। वही बेतिया राज की जमीन पर बसे पंचायत के कई मोहल्ले की भूमि पर कानून मान्यता के लिए भूख हड़ताल पर हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश मोदी सत्याग्रह का सम्मान करें और चंपारण में जारी मिल हो और सामान तू के द्वारा जारी शोषण बंद करें इस क्रम में उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद बिहार में जमीदारी उन्मूलन की घोषणा हुई है। लेकिन भूमि सुधार नहीं हुआ जिसे भूमि आयोग की सिफारिश के अनुसार 21लाख एकड़ से ज्यादा जमीन भूमि चोरों के अधिपति में है आयोग के अनुसार पश्चिमी चंपारण भी 135001 और पूर्वी चंपारण की 97000 और कुल 2लाख 37 हजार एकड़ जमीन चीनी मिलों और भूमि चोरों सामंतो के पास में है। लोगों के पास भूमि तक नहीं नीतीश सत्याग्रह वर्ष पर ढोंग ढकोसला कर रहे हैं ।और भूमि सुधार करने से के बदले गरीबों को जमीन से बेदखल कर रहे हैं। वही मौके पर सुनील राव, नवीन मुखिया, सीता राम राम, नंद किशोर महतो, सुदामा प्रसाद, विजेंद्र प्रसाद गुप्ता सहित कई उपस्थित रहे हैं।

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