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आशुतोष कुमार सिंह,स्वतंत्र टिप्पणीकार
दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता में बैठकर किसी को चीनी कहकर अपमानित कर देना बहुत आसान काम है। लेकिन आपके इस अपमान का पूर्वोत्तर के भारतीयोन पर क्या प्रभाव पड़ता है शायद ही आपने सोचा होगा! 26-27साल की उस युवती के बोल मुझे आज भी परेशान करता है। स्वस्थ भारत यात्रा के दौरान अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में मिली इतिहास उस छात्रा ने कहा था दिल्ली मुम्बई से आने वाले सभी लोगों का हमलोग गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। उनकी मेंहमान नवाजी करते हैं। फिर ये लोग दिल्ली गए हमारे भाइयों को चीनी कहकर अपमानित क्यों करते हैं?  बीते अप्रैल में स्वस्थ भारत यात्रा के दौरान वहां जाने का मौका मिला था। महिलाओं की सभा को जब हम संबोधित कर रहे थे तब 65 वर्ष की एक महिला ने कहा कि हम यहाँ पर सम्बोधन में जय हिन्द का प्रयोग करते हैं। 2 दर्जन से ज्यादा जनजातियां यहाँ पर है और सबकी अपनी अपनी भाषा है। लेकिन ये सभी एक दूसरे जनजाति से बात करने के लिए हिंदी का ही प्रयोग  करते हैं। हमें हिंदुस्तान  से उतना ही प्यार है, जितना आपको है। इस तरह बात सुनकर मैं हैरान था! यह सोच रहा था कि क्या दिल्ली वालों को अपने देश के भूगोल की जानकारी नहीं है अथवा वे जानना नहीं चाहते।

इसी कड़ी में बीते शुक्रवार सलमान खान एवं सोहैल खान अभिनीत फ़िल्म #ट्यूबलाइट रिलीज हुई है। महात्मा गांधी से लेकर 62 की चीन भारत लड़ाई तक के समयकाल को दर्शाया गया है। इस फ़िल्म के समीक्षकों ने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पर कम ध्यान दिया है। वो है इस फ़िल्म में दर्शायी गयी वो कहानी जिसमे हिंदुस्तान में जन्में हिंदुस्तानी लड़के को गांव वाले चीनी कहकर मारने दौड़ते है। नायिका के पिता को लोग इसलिए मारते हैं क्योकि उसका चेहरा चीनियों जैसा दीखता है। गजब की कायराना हरकत है ये। 1962 की पृष्ठभूमि में बनी फ़िल्म में अपने हिन्दुस्तानियों भाइयों के साथ हम जो करते नजर आये हैं वो स्थिति  आज 55 साल बाद भी है। हम बिलकुल नहीं बदले। और हम चाहते हैं की पूर्वोत्तर के लोग हमे गले लगाते रहें और हम उन्हें जुतियाते रहें।

आखिर यह सब कब तक चलेगा। अगर आपको पुर्वोत्तर के लोगों का प्यार चाहिए तो पहले उन्हें प्यार देना सीखिये!

संपर्क 9891228151

#Tublight #SwasthBharatYatra

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