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प0 चंपारण बेतिया सतेंद्र पाठक

बेतिया। प0 चंपारण समाहरणालय के समक्ष एआईटीयूसी जिला इकाई के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया गया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संविदाकर्मीयो, किसानों ने श्रम मंत्रालय भारत सरकार एवं नीति आयोग के साथ गांठ से संविदा कर्मियों के समान काम के लिए समान वेतन के कानून को समाप्त कर देश के करोड़ों संविदाकर्मियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने की साजिश कर रही है। संविदा श्रम नियम एवं उन्मूलन कानून 1971 की धारा 25 में क्या प्रावधान किया गया है कि समान काम के लिए समान वेतन देने का प्रावधान है। इस कानून को समाप्त करने से संविदा कर्मियों को समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार समाप्त हो जाएगा और नियोजित कर्मियों का पूर्ण संवैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा। कोई भी राज्य सरकार चाह कर भी संविदा कर्मियों को समान काम का समान वेतन नहीं दे सकती है। एक तरह सरकार पेंशन को तो खत्म कर दी है। इस तरह नया कानून बनाकर देश के करोड़ों संविदा कर्मियों के भविष्य का रास्ता बंद कर देना चाहती है। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मनरेगा योजना, ग्रामीण विभाग एवं अन्य विभागों के बड़े पैमाने पर संविदा कर्मी कार्यरत हैं। जिस का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इस तरह के काले कानून बनाने तथा धारा 25 को समाप्त करने का विरोध नाटक करती है। साथ में किसानों के खेती बारी के समय बैंकों द्वारा कर्ज वसूली के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है, जो अव्यवहारिक है। किसानों के घर में जब खरीफ फसल एवं गन्ना फसल का कीमत होता है तो वह सोया रहता है, लेकिन जब किसान खरीफ फसल की खेती में व्यस्त हो जाता है, तो किसानों के खाली घर से कर्ज वसूली का बेतुका प्रयास किए जाते हैं। किसानों से कर्ज वसूली अवतरित किया जाए तथा कर्ज माफ किया जाए की मांग को भी प्रदर्शनकारियों ने उठाया। संविदा कर्मियों के विभिन्न मांगों पर लगातार संघर्ष करने वाले भाकपा के जिला मंत्री ओमप्रकाश क्रांति ने बताया कि आज भारत सरकार के प्रधानमंत्री देश के सवा सौ करोड़ जनता की बात करने वाले जनता के सभी जनतांत्रिक अधिकारियों को समाप्त कर हिटलरशाही शासन चलाना चाह रहे हैं। 

जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आज किसान मर रहे हैं, नौजवान खुदखुशी कर रहे हैं, जवान सीमा पर अमर रहे हैं, बैंक सर्विस चार्ज के नाम पर बैंक खाताधारकों को लूट रहे हैं, छोटे एवं मजबूर व्यापारियों पर जीएसटी थोपा जा रहा है। आज देश में भूचाल मचा है। सरकार की जनविरोधी नीतियों का एटक विरोध करते हैं। इस प्रतिरोध मार्च के मौके पर एटक नेता राजीव रंजन झा, ठाकुर राम, राधा मोहन यादव, नवीन राय, अखिलेश पांडे, बबलू दुबे, नागेश्वर दत्त तिवारी, विणा देवी सहित कई उपस्थित रहे।

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