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समस्तीपुर से लक्ष्मी प्रसाद/शंकरानंद झा

हसनपुर। प्रखंड के 124 विद्यालयों में बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है। अधिकतर विद्यालय निर्धारित समय से एक घंटा पूर्व ही बंद कर दिए जाते हैं। भला उपचारात्मक शिक्षा प्रदान करने के समय में विद्यालय बंद रहे तो यह बच्चों के भविष्य के साथ खेलवार नहीं तो क्या है । शिक्षा विभाग के आदेशानुसार आनंदशाला कार्यकर्म के 

तहत सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को विद्यालय संचालन की अवधि में 3 बजे से 4 बजे तक एक घंटा बच्चों के बिच उपचारात्मक शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया जा चुका है। इस शिक्षा के अंतर्गत विद्यालयों में अध्ययनरत वैसे छात्र – छात्राओं को चिन्हित किया जाना है जो पढने में कमजोर हैं। इन चिन्हित छात्र-छात्राओं को लक्षीत छात्र का नामकरण कर सरलतापूर्ण तरीके से शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया जा चुका है। परंतु विद्यालयों के शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों पर इस निर्देश का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा। अबोध बच्चे अज्ञानता के कारण शिक्षकों से उपचारात्मक शिक्षा के लिए कह भी नहीं पाते हैं। परंतु अपने बच्चे को एक घंटा पूर्व ही स्कूल से घर पहुंचते देखकर अभिभावक जब अपने बच्चों से पुछताछ करते हैं तब यह बात सामने आती है कि निर्धारित समय से एक घंटा पूर्व ही विद्यालय में छुट्टी दे दी जाती है।।एक घंटा पूर्व ही विद्यालयों में बच्चों की छुट्टी कर दिए जाने से शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए चलाए जाने वाले आनंदशाला कार्यक्रम पर प्रश्न चिन्ह लगता हुआ दिखाई पर रहा है।
क्या है उपचारात्मक शिक्षा :-
बच्चों के बिच गुणवत्तापूर्ण  शिक्षा प्रदान करने की दिशा में शिक्षा विभाग के निर्देश पर चलाया जाने वाला एक सराहनिय पहल है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालयों में सभी वर्गों से पढने में कमजोर छात्र – छात्राओं को चयनित कर तीन बजे से चार बजे तक सरलतापूर्ण तरीके से अध्ययन करवाना है। इसके अंतर्गत एक विद्यालय में बीस छात्र – छात्राओं को चयनित कर उन्हें लक्षीत छात्र का नामकरण करना है। साथ ही इसी अवधि में प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को कार्यालय संबंधित कार्य का निपटारा भी करने का निर्देश दिया जाता है।
उपचारात्मक शिक्षा से बच्चों को क्या होगा फायदा :-
विद्यालयों में वर्ग संचालन के समय पढने में  कमजोर एवं तेज दोनों छात्रों का समावेश रहता है। इस क्रम में पढने में कमजोर छात्र छात्राओं को पाठ्यक्रम समझने में परेशानी होती है। यदि इन कमजोर छात्र-छात्राओं को लक्षीत छात्र के रूप चयनित कर उपचारात्मक शिक्षा के तहत सरलतापूर्ण तरीके से पाठ्यक्रम का अध्यापन कराया जाए तो बच्चों के सतत विकास में कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
कहते हैं बीईओ :-
    प्रखंड के कई गांवों से अभिभावकों के द्वारा इस तरह की शिकायतें सुनने को मिल रही है कि तीन बजे ही विद्यालयों में बच्चों की छुट्टी दे दी जाती है। शिकायत के आलोक में पूर्व में भी कई बार औचक नीरिक्षण कर निर्धारित समय से पूर्व विद्यालय को बंद करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की अनुशंसा जिला शिक्षा पदाधिकारी से की जा चुकी है। पुन: विद्यालयों का औचक नीरिक्षण किया जाएगा। साथ ही उपचारात्मक शिक्षा पर अमल करने का आदेश दिया जाएगा।
ललन कुमार पांडेय, बीईओ, हसनपुर

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